काठमांडू कॉलिंग

एक समय ऐसा आता है कि आप सबकी खुशी और सबके मन की सोचते-सोचते अपने मन की सुनना और समझना भूल जाते हो । कभी वो बोलता भी है तो उसे हँस कर पागल समझने लगते हैं । कभी अंजानी गहरी उदासी घेर कर उसे इतना डुबो देती है कि हाथ-पाँव मार कर वो साँस… Continue reading काठमांडू कॉलिंग

पानी

  पानी तो बरसा , बहुत बरसा , आसमान के नदी-नाले तोड़ कर बरसा , मानो पूर्वजों के सारे दर्द बूँदों में बदल गए ! ईश्वर ने सोचा , कोई भागीरथ फिर नही आया तो क्या , बच्चा मेरा घरती पर प्यासा क्यों तरस रहा ? फिर बरसा , बहुत बरसा लेकिन ये क्या ,… Continue reading पानी

चाँद

ओ चाँद !! तू कितना अकेला है !! तारों से भरा आसमाँ है पर चलता बिल्कुल अकेला है । वो ग्रहण भी आता है तो तुझे ही सताता है !! कभी लाल तो कभी काला कर जाता है । वो हल्के , रूई से बादल आते हैं तुझ को ही ठग जाते हैं !! अमावस… Continue reading चाँद

ज़िंदगी

ज़िंदगी एक दिन मिली थी राह में मैंने कहा , आ बातें करें तनहाई में बेवफ़ा है तू बड़ी हर बात में , चलती कहाँ है तू मेरे जज़्बात में !! छोड़ दिया था साथ मेरा , बीच राह में !! थक गया हूँ , मैं तेरी हर चाल में कैसे फँस गया हूँ ,… Continue reading ज़िंदगी

बवंडर

  कैसे धुंधला गए हैं चेहरे समय की आँधी में आता है कभी यादों का बवंडर फिर गुज़र जाता है धीमी चाल से छोड़ जाता है वो फिर अपने निशाँ । कहीं दिल छिल गए , हैं कहीं कोरी नज़र , कहीं उखड़े हैं पेड़ तो कहीं उजड़ी है छत फिर न पेड़ लगते हैं… Continue reading बवंडर

रात के साए

शहर में भटकते वो रात के साए है कहीं उनका भी कोई गाँव में । फ़ुटपाथ पर सोते हुए झलती है पंखा आती-जाती गाड़ियाँ । लिपटा है वो भी इंच भर की मौत में , चला आया यहाँ रोटी की खोज में । चूल्हा है ठंडा आज माँ का अपने बेटे की सोच में ।… Continue reading रात के साए

घर

ये तेरा घर , ये मेरा घर ये ईंट-पत्थरों का घर फिर भी है ये मेरा घर । बड़े-बड़े ये महल , शानों-शौकतों से भरे , चले गए , बना के सब , सिर्फ़ नाम रह गए । गुमनाम सा है ये महल , कोई नही जो कह रहा , ये मेरा घर , ये… Continue reading घर