मन बंजारा

मन बंजारा माया हर रोज़ की तरह सुबह छ: बजे उठ कर बाहर बालकनी में आकर खड़ी हो गई थी । उसकी बालकनी के ठीक सामने ही एक घना गुलमोहर का पेड़ था । उस पर हरे पत्तों में लाल फूलों के गुच्छों पर जब सूरज की पहली किरणें पड़ती तो वो सुनहरे रंग में… Continue reading मन बंजारा

चाँद

ओ चाँद !! तू कितना अकेला है !! तारों से भरा आसमाँ है पर चलता बिल्कुल अकेला है । वो ग्रहण भी आता है तो तुझे ही सताता है !! कभी लाल तो कभी काला कर जाता है । वो हल्के , रूई से बादल आते हैं तुझ को ही ठग जाते हैं !! अमावस… Continue reading चाँद

ज़िंदगी

ज़िंदगी एक दिन मिली थी राह में मैंने कहा , आ बातें करें तनहाई में बेवफ़ा है तू बड़ी हर बात में , चलती कहाँ है तू मेरे जज़्बात में !! छोड़ दिया था साथ मेरा , बीच राह में !! थक गया हूँ , मैं तेरी हर चाल में कैसे फँस गया हूँ ,… Continue reading ज़िंदगी

बवंडर

  कैसे धुंधला गए हैं चेहरे समय की आँधी में आता है कभी यादों का बवंडर फिर गुज़र जाता है धीमी चाल से छोड़ जाता है वो फिर अपने निशाँ । कहीं दिल छिल गए , हैं कहीं कोरी नज़र , कहीं उखड़े हैं पेड़ तो कहीं उजड़ी है छत फिर न पेड़ लगते हैं… Continue reading बवंडर

रात के साए

शहर में भटकते वो रात के साए है कहीं उनका भी कोई गाँव में । फ़ुटपाथ पर सोते हुए झलती है पंखा आती-जाती गाड़ियाँ । लिपटा है वो भी इंच भर की मौत में , चला आया यहाँ रोटी की खोज में । चूल्हा है ठंडा आज माँ का अपने बेटे की सोच में ।… Continue reading रात के साए

घर

ये तेरा घर , ये मेरा घर ये ईंट-पत्थरों का घर फिर भी है ये मेरा घर । बड़े-बड़े ये महल , शानों-शौकतों से भरे , चले गए , बना के सब , सिर्फ़ नाम रह गए । गुमनाम सा है ये महल , कोई नही जो कह रहा , ये मेरा घर , ये… Continue reading घर

मैं नूँ दिलों मुकाइए

बुल्लेशा गल ताईंयों मुकदी , जद “मैं” नूँ दिलों मुकाईये……… हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में एक गाँव है कलोल । इस दूर दराज़ गाँव में बेटियों के लिए जो मुहीम चलाई जा रही है वो देखकर मैं नतमस्तक हो गई , उन लोगों के प्रति जिन्होंने इसे शुरू किया । मन चाहा कि इसे… Continue reading मैं नूँ दिलों मुकाइए