घर

ये तेरा घर , ये मेरा घर

ये ईंट-पत्थरों का घर

फिर भी है ये मेरा घर ।

बड़े-बड़े ये महल ,

शानों-शौकतों से भरे ,

चले गए , बना के सब ,

सिर्फ़ नाम रह गए ।

गुमनाम सा है ये महल ,

कोई नही जो कह रहा ,

ये मेरा घर , ये तेरा घर ।

उजड़ गए हैं रिश्ते सब ,

बस रहे हैं फिर भी घर ,

मेरा-तेरा है ये घर ,

हमारा कब ये होगा घर !!

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