अजीब है ये ज़िंदगी

ये ज़िंदगी भी बड़ी अजीब है !

चलते – चलते बदल जाती है !

सोचते कुछ हैं तो कर कुछ और जाती है !

चाहते कुछ हैं तो दे कुछ और जाती है !

किसी को ख़्वाब बेशुमार तो किसी को ख़ुमारी दे जाती है !

हम पीछा किए गए इसका और ये हमें डॉज दिए जाती है !

किसी को थपकी दे-दे सुलाती है तो किसी को नींदों में डराती है !

ऐ ज़िंदगी , तू सचमुच बड़ी अजीब है !

आ हम पर भी कुछ करम कर , हमारे ख़्वाबों पर भी रहम कर ।

चल हमारे संग भी दो क़दम , कर लेंगे हम उसी में बसर ।

 

8 thoughts on “अजीब है ये ज़िंदगी

  1. बहुत खूब 💛 आपकी कविता पढ़के मुझे सआदत हसन मंटो की एक लाइन याद आ रही है…
    #मुख्तसर अल्फ़ाज़ में ज़िन्दगी के मुताल्लिक सिर्फ ये कहा जा सकता है, कि यह एक “आह‌” है जो “वाह” में लपेटकर पेश की गयी है!!

    Liked by 1 person

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