क्या झमेला है !

क्या झमेला है !

ये रिश्तों का कैसा रेलम-पेला है ?

भीड़ सी मची है जैसे अजनबियों का मेला है ,

न मैं जानूँ उन चेहरों को

न वो पहचानें मेरी राहों को फिर भी लाखों के लाईक्स हो गए !

तू काम का है तो मेरा है वरना तू भीड़ में भी अकेला है ।

क्या करें यूज़ एंड थ्रो का ज़माना है !

क्रैडिट से काम चलाना है , कौन सा अपनी जेब से जाना है !

हम सिर्फ़ बंटोरते रह गए , वो हमारे पिन कोड से समेट कर ले गए !

कहता तो वो मुझको अपना था फिर मेरा नंबर ब्लॉक कर कहाँ चले गए !

पहले तो रिश्तों की एहमियत पर बड़े-बड़े मैसेज भेजा करते थे ,

इंसान के अख़लाक़ पर हिला देने वाले वीडियो शेयर किया करते थे !

हम उन उपदेशों पर अपने को आँकते रह गए

और वो उपदेशों के सैंसेशन बन ज़माने को हाँकते चले गए ।

5 thoughts on “क्या झमेला है !

    1. हा , हा ! बस यूँही गैजेट्स से उकता कर , कुछ लोगों के बदलते ईमान को देखकर लिख डाला । हौसला अफ़ज़ाई के लिए आपका बहुत शुक्रिया ।

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