धड़कता दिल

धड़कता तो दिल पहले भी था ,

हर नए क़दम पर धड़कता था ,

कभी किसी की निगाह पर धड़कता था

तो कभी किसी ख़्याल पर धड़कता था ,

शायद जवानी के जज़्बात पे धड़कता था !

धड़कता तो दिल आज भी है !

हर उठते क़दम पर धड़कता है ,

तारीक़ नज़र पर धड़कता है ,

जज़्बातों को दफ़्न करने पर धड़कता है ,

धड़कनें तो वही हैं जनाब पर वक्त की धड़कनें अब ख़िलाफ़ हैं ।

माला जोशी शर्मा

5 thoughts on “धड़कता दिल

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