आसमां

ऐ आसमां तू यूं ही इतराता है !
सारे जहां पे छाया रहता है ,
तुझमें जो रंग समाए हैं ,
सारे तूने सूरज से चुराए हैं ,
चांद – तारों ने तुझे अंधेरी – काली रात से बचाया है ,
बादलों ने भर-भर तेरी प्यास को बुझाया है ,
सारे नक्षत्रों ने तेरा मान बढ़ाया है ,
फिर तू क्यों इतराया है ,
तू बता , क्या तू ही सबका सरमाया है ?
तू ही बता , क्या सूरज , चांद, तारों , बादल , नक्षत्रों के बिना तेरा कहीं गुज़ारा है ? 
माला जोशी शर्मा

6 thoughts on “आसमां

  1. बहुत बढ़िया।
    माना तूँ बहुत बड़ा,विशाल है,
    मगर कभी सोचा है
    तुझे बड़ा बनाया किसने,
    ऐ आसमां
    तुझे सुंदर बनाया किसने।

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