कर्मफल

आज बैठे बैठे एक विचार मन में आ रहा है । जिन परिस्थितियों से आज हम गुज़र रहे हैं ऐसे में इस तरह के विचार आना स्वाभाविक है । हम अक्सर कर्मों की बात करते हैं लेकिन उसका प्रत्यक्ष प्रमाण अब मिला । कुछ बड़ी विकट स्थिति में फंसे हैं तो कुछ सुरक्षित और कुशल हैं । मन में विचार आया कि क्या ये सब कर्मफल नहीं है ? कहीं कुछ तो हमने ऐसे कर्म किए होंगे जो आज ईश्वर ने हमें ऐसी स्थिति में रखा । हम परिस्थितिवश घरों में कैद होने पर मजबूर हो गए हैं ।  ऐसा लगता है कि जैसे वो ऊपरवाला हमें बहुत कुछ सिखाना चाहता है । इंसान जो अपने को सर्वशक्तिमान , बुद्धिमान और चांद-सूरज को वश में करने का दम भरता है ,एक वायरस के वश में फंसा है और राह नहीं सूझ रही है ! क्या हैं हम इस सृष्टि में ? निमित्त मात्र ! समझा दिया कि इंसान तू सर्वज्ञ नहीं । अभी बहुत कुछ है जो तू नहीं जानता , जो तुझे जानना बाकी है । हम सब अभी आधे-अधूरे हैं ।

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