नया सवेरा

जैसा बीता गया साल , मत पूछो बस क्या हुआ हाल
हर दिल में एक कहानी है , आशा हर दिन ही हारी है।
दीवारों में बंद अकेलापन‌ ,अनारकली का दर्द सुनाती सी ।
हर घर में सन्नाटा सुनता था , पड़ौसी ही पड़ौसी से घबराता था ।
मां-बाप अकेले डरते थे जो कभी बच्चों को निडर बनाते थे ।
कितने ही अकेले गुज़र गए , इस महामारी ने निगल लिए ।
हे प्रभु करो अब ऐसी कृपा , सब अंधकार अब मिट जाए ।

नया साल है आया लेकर नई आशा की नई किरण
कोई उदास न अकेला हो , नए जीवन का अब सवेरा हो‌।

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