स्वच्छता

 

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने लालकिले पर खड़े हो कर स्वच्छता और शौचालय की बात की तो लगा अब हुई है बात मुद्दे की । महान देश का नारा तो सब लगाते हैं लेकिन उसे महान बनाने के लिए करना क्या चाहिए ये बात कोई नही करता । आखिर महानता की परिभाषा क्या है ? क्या केवल आध्यात्म की बात करना , योग की बात करना ही देश को महान बनाता है ? बहुत अच्छा लगता है ये बातें करना लेकिन जब मैं ट्रेन में बैठ कर दिल्ली से कहीं बाहर जाती हूँ या बाहर से दिल्ली आती हूँ तो मेरा मन एक अजीब सी भावना से भर जाता है । गुस्सा , दुख और बेचैनी का मिला-जुला भाव आता है । नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से गाड़ी निकलते ही गंदगी के ढेर , गंदे नाले से उठती गंध किलोमीटर तक चलते हैं । उन्हीं गंदगी के ढेरों पर लोग रहते हैं , उन्हीं गंदे , बदबू से भरे नालों पर बच्चे खेलते हैं , छोटे – छोटे बच्चे , हमारे देश के भावी कर्णधार उन कूड़ो के ढेरों में अपने भविष्य की न जाने कौन से ताले की चाबी खोजते रहते हैं । पता नही इन बड़े-बड़े लोगों की गाड़ियाँ यहाँ से क्यों नहीं गुज़रतीं ? सुबह – सुबह गाड़ी निकलती है तो सैंकड़ों लोग उन्हीं नालों और गंदगी के ढेरों पर शौच कर रहे होते हैं । गौर तलब ये है कि ये सारे इलाके दिल्ली की सीमा में ही आते हैं ।

इतने वर्षों बाद भी हम कूड़े को कैसे इस्तमाल करना है , उसे कहाँ डाला जाना है ये प्रबंध नही कर पाए । ये हाल तो हमारी राजधानी का है , सोचिए पिछड़े इलाकों का क्या हाल होगा । शहर में नए शौचालय बने हैं लेकिन नहीं हमें तो प्रकृति पसंद है , बड़ी – बड़ी गाड़ियों से उतरेंगे और बाहर किसी दीवार पर करेंगे । अब हर कदम पर तो शौचालय नही बना सकते , थोड़ा कष्ट कीजिए , शहर की दीवारों को शौचालय मत बनाइये । मैंने ख़ुद अक्सर देखा है और आपने भी देखा होगा कि बड़ी-बड़ी गाड़ियों में घूमने वाले और कूड़े के ढेर के सामने से नाक पर कपड़ा रख कर जाने वाले अपनी कार का शीशा नीचे कर सड़क पर कूड़ा फेंकने से ज़रा भी नहीं हिचकते । देशभक्ति के नारे लगाने वाले अपने देश को कूड़ाघर क्यों बना रहे हैं ? देश का प्रधानमंत्री इतनी बड़ी बात कह देता है “हमें देवालय नही , शौचालय बनवाने हैं” वो आपके दिल में विचार डाल सकता है लेकिन आपकी गलियाँ और सड़कें तो साफ़ नही कर सकता । क्या सारा दोष सरकार और म्यूनिसपलटी का है ? देश को कचराघर बनाने में क्या हमारा अपना कोई दोष नही ? क्या हम एक ज़िम्मेदार नागरिक हैं ?

गर्व से करोड़ों रुपए शादी में खर्च करने वाले या यूँ कहूँ तो ग़लत नही होगा कि बरबाद करने वाले , अपना थोड़ा सा धन देश के इन मुद्दों को संवारने में नही लगा सकते ? अगर आप देश से इतना ही प्यार करते हैं तो कुछ ऐसा करिए कि आपकी आने वाली पीढ़ियाँ आप पर गर्व कर सकें । उन्हें ऐसे संस्कार दीजिए कि देशप्रेम का सही माइने समझ सकें । धर्म और जाति का राग आलापना बंद कीजिए और ज़िम्मेदार नागरिक बन कर दिखाइए ।

मेरी इन बातों से कोई और मतलब मत ले उड़िएगा । मैं किसी राजनैतिक पार्टी की प्रवक्ता या समर्थक नही हूँ लेकिन सही बात की समर्थक अवश्य हूँ फिर चाहे वो किसी भी व्यक्ति विशेष ने कही हो ।

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